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Saturday, February 16, 2019

Bomb blast in pulama Kashmir | 42 CRPF JAWANS DEAD

*इतिहास गवाह है जब जब देश में चुनाव नजदीक आते हैं तब तब आतंकी और नक्सली हमले होते हैं !*
समीक्षा:-
*विचार करनेवाली बात यह है कि इस तरह के आतंकी हमलों से देश के लोगों में उत्पन्न हुई भावनाओं से किन लोगों को फायदा होता है*
*1 पाकिस्तान को ?*अगर हमारे सैनिकों को मारने से ही पाकिस्तान के लोगों को या सरकार को शांति मिलती है या फायदा मिलता है तो वह चुनावों के नजदीक आने पर ही क्यों हमले करते हैं ?*उनका भारत मे हो रहे चुनावों से क्या सम्बंध है?*अगर चुनावों के दौरान ही पाकिस्तान को हमला करने में फायदा होता है तो वह सत्ताधारी पार्टी के नेताओं और मंत्रियों पर हमले क्यों नहीं करते हैं?आखिर बेकसूर सैनिकों को मारने से उन्हें क्या मिलता है?


2 माना जाए कि आतंकी धार्मिक उन्माद फैला रहे हैं
तो भारत में धर्म के नामपर उन्माद फैलाने वाले कितने *RSS बजरंग दल, विहिप नेता पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी लोगों के हाथों मारे गये?*
क्यों वह इन लोगों को निशाना बनाने कि बजाय देश कि सीमा पर कार्य करनेवाले अधिंकाश 99.99% मूलनिवासी बहुजन सैनिकों को निशाना बना रहे हैं?
3 अगर देश मे चुनावों के समय आतंकी हमले होते हैंतो क्या होता है?*एक देशभक्ति कि भावना का निर्माण होता है।*जो वाजिब भी है।तो सोचने वाली बात है कि आजादी के समय से देश के सैनिक मारे जा रहे हैं तो इस मुद्दे का स्थायी समाधान अबतक कि सरकारों ने क्यों नहीं किया?क्या यह मुद्दे जानबूझकर हल नहीं किए गये हैं?*इस तरह के मुद्दों का फायदा सत्ता मे बनें रहने के लिए किया जा रहा है*भारत कि जनता को यह क्यों नहीं सोचना चाहिए?
*4 चुनावों के नजदीक यह हमले होते हैं या युद्ध कि स्थिति बनती है तो जनता मे क्या माहोल बनता है।*
देशभक्ति का, देश के लिए मर मिटने का जो कि जायज है फिर इसी माहौल में चुनाव हो जाते हैं। *भारत कि जनता के सभी वास्तविक मुद्दे भुखमरी, बेरोजगारी, ईवीएम षड्यंत्र,गरीबी, पांच साल देश कि जनता पर किये अन्याय, अत्याचार के मुद्दे, भारत कि जनता के विरोध में बनाई नितियाँ सभी गौण हो जाते हैं*
फिर वही लोग चुनकर आ जाते हैं
और फिर पांच साल वही खैल चलता रहता है
*इसलिए यह समय भावुकता का नहीं बल्कि मंथन का है*
1 आजादी के 70 साल बाद तक किन लोगों कि सरकारें रही है?और उन्होंने अबतक इन मुद्दों का स्थायी समाधान क्यों नहीं किया?कबतक हमारे सैनिक मारे जाएंगे? इसके लिए जनता का कार्य लोकतंत्र में वोट देकर सही सरकारों को चुनना है।और सही नितियाँ बनाकर इन मुद्दों का हल सरकार को करना होता है*देश कि सुरक्षा कि जिम्मेदारी खुफिया एजेंसियों, सेनाओं और पुलिस प्रशासन कि है इसके लिए ही जनता सही सरकारों को चुनतीं है*ना कि भावनाओं मे बहकर उसके भावनात्मक होने से समस्याओं का समाधान होता है।याद रखिए भावनाओं को भडकाने के लिए और भावनाओं के आधार पर वोट लेकर ही अबतक देश मे जनता के वोटों के दोहन का खैल चल रहा है*इसलिए इस बार जागरूक नागरिक बनिए सही सोचिए दिमाग से सोचिए।*

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