पश्चिमी चम्पारण सेमरा मदरसा पे एक ख़ास नज़र? - FACE INSIDER

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Sunday, April 8, 2018

पश्चिमी चम्पारण सेमरा मदरसा पे एक ख़ास नज़र?

पश्चिमी चम्पारण सेमरा मदरसा पे एक ख़ास नज़र
               Article Source :-  Arshitech                          Written By : Er. Aftab Alam 


चम्पारण की सर ज़मीं पे एक बहुत ही पुराना इदारा जामिया इस्लामिया कुरानिया सेमरा है. जो अपने आप में एक मिसाल लिए मुद्दतों से कामयाबी की राह पे चल रहा है. ये इदारा इस इलाक़े का सब से पुराना मदरसा है जिस की अस्थापना 1846 में हाफिज बादशाह मरहूम के हाथों हुआ था.इस मदरसे में लगभग 1500 बच्चे तालीम हासिल करते हैं. क़रीब 700 बच्चे मदरसा में रहते हैं और उनका खाना मदरसा के तरफ से दिया जाता है.इस मदरसे में ख़ास तौर से हिफ़्ज़ क़ुरआन की पढ़ाई होती है और हर साल 166 बैच हिफ़्ज़ क़ुरआन के फ़ारिग़ होते हैं मतलब ये मदरसा हिफ़्ज़ कुरान के लिए ही मशहूर है.लोगों का ये भी कहना है कि यहाँ के हाफिज पूरी दुनिया में आला मुकाम रखते हैं और उन्हें बहुत अच्छी तरह क़ुरआन याद होता है और यहाँ के हाफिज क़ुरान को मात देना आसान नहीं होता है.
इस मदरसे की कामयाबी और नाम नमूद का ये हाल है के भारत के हर एक सूबे के बच्चे यहाँ हाफ़िज़ क़ुरान के लिए आते हैं.मदरसे का पूरा खर्च ज़कात के माल से पूरा किया जाता है,मदरसा एक ख़ास मुकाम रखता है इसलिए लोग भी बहुत बढ़ चढ़ के ज़कात देते हैं,वैसे लोगों के जरिये वक़्फ़ किया हुआ ज़मीन भी मदरसे के पास है,लेकिन मदरसे के पास इतनी जमीन नहीं है के पूरा खर्च खुद ही पूरा कर सके,मदरसे के पास जरुरत की हर तरह के इन्तेज़ामात मौजूद हैं.

मुझे सूत्रों से पता चला है के उस्ताद के लिए कुछ विशेष खाना अलग से बनता है,जैसे रात के खाने में बच्चों को रोटी नहीं दी जाती जबकि उस्ताद के लिए रोटी बनती है,मुझे तो एक बात यहाँ तक पता चली है के दो भाई एक साथ इसी मदरसे में पढ़ते थे,एक भाई बहुत बीमार होगया डॉक्टर ने दवाई दी और बोला के रोटी ही खिलाना,रात में दवाई खाने से पहले बीमार बच्चे का भाई जब रोटी लेने गया तो उससे रोटी नहीं दी गयी और मजबूरन बिस्किट्स खा के बिमार ने दवाई खा ली जिससे उसकी हालत बिगड़ गयी और उसकी मौत हो गयी..खैर मौत तो बरहक़ है जब आणि होगीके ही रहेगी बहाना कोई भी हो लेकिन अगर ऐसी बात हुयी है तो ये बहुत ही गलत बात है.मैं इस बात की सच्चाई की पुष्टि नहीं कर रहा हूँ लेकिन ये बात सुनने में आयी है.लोग ज़कात इसलिए देते हैं के ग़रीब यतीम मिस्कीन बच्चों का खाना कपडा और बाक़ी उनकी जरूरत को पूरी की जाये,मदरसे को भी चाहिए के बच्चो का पूरा पूरा ख्याल रखा जाये,कोई अपना बच्चा आप के हवाले करता है तो आप से अच्छी उम्मीद रखता है.कोई भी ज़कात इसलिए नहीं देता के मदरसे की इमारत बने या उस्ताद का तन्खवाह दिया जाये.
ज़कात का माल वसूल करने के लिए कुछ लोगों को तन्खवाह पे रखा गया है जो हर महीने उनको मिलता रहता है.अगर बिच में उस्ताद को भी जाना पड़ता है तो ज़कात के माल के लिए भेजा जाता है वैसे उस्ताद लोगों को रमजान और बक़रईद की छुट्टी में ज़कात की वसूली करने जाना पड़ता है और जाते भी है.ख़ास बात ये है के छुट्टी में भी उस्ताद और वसूली करने वाले मुलाज़िम की तनख्वाह मदरसा देती है, क्यों के ज़कात की वसूली भी मदरसे का काम है इसलिए उन्हें तनख्वाह देना लाज़मी है.अब मसला ये है के छुट्टी में तनख्वाह मिलने के बावजूद ये लोग ज़कात के माल में से 30 प्रतिशत कमीशन के रूप में क्यों लेते हैं?और इन्हे मदरसा क्यों देती है?मतलब लोगों का दिया हुआ ज़कात का माल 30 प्रतिशत ऐसे ही हवा में उड़ जाता है.कुछ मदरसे तो ऐसे भी है जो 50 प्रतिशत कमीशन पे लोगों से वसूली करवाती है. ज़कात के माल का इस तरह से बंदरबांट क्या सही है?क्या इस्लाम इस बात की इज़ाज़त देता है??आप ऐसा बिल्कुल न सोचें कि आप ने ज़कात दे दिया और आप का फ़र्ज़ पूरा होगया,जकात देने वालों पे भी इस्लाम में कुछ हिदायत है जिन्हे जानना आप का फ़र्ज़ है.
मदरसे में सोहबतें हम जिन्स मतलब होमोसैक्स (Homo Sexuality) और हस्तमैथुन (Masturbation) की वबा बहुत तेज़ी से फ़ैल रही है. ये वही वबा है जो क़ौमे लूथ को तबाह व बर्बाद कर दी. मदरसे में कुछ बड़े उम्र और कुछ छोटे उम्र के लड़के भी पढ़ाई करते हैं,बड़े उम्र के लड़कों में सिंफी एहसासात पैदा (Sexual Awareness) हो चुकी होती है जिन्हें पूरा करने का कोई सूरत नहीं नहीं आती है,वो अपनी ख्वाहिश पूरी करने का कोई न कोई रास्ता निकालने की कोशिश में लग जाते हैं,और उन्हें अपने ही मदरसे के छोटे मासूम बच्चे दिखाई देते है जो ऐसी सोच से परे होते हैं,अब ये बड़े बच्चे उन्हें लालच दे कर या डरा कर या नींद की हालात में उनके साथ सेक्स करते,किसी भी तरह अपनी खवाहिश को अंजाम देने में कामयाब हो जाते है,अगर कोई साफ़ सुथरा गोरा बच्चा है तो उसकी खैर नहीं है..उसपे ऐसी कितनी हवास से भरी चमकती आँखें उस पे पड़ने लगती है,अक्सर ये कोशिश मे लग जाते हैं कि मुझ से दोस्ती हो जाये मेरे कमरे में ही इसका भी बिस्तर मिल जाये,उस लड़के के चाहने वाले और ख़ातिर करने वाले इतने मिल जाते हैं कि उससे ऐसा लगता है के ये मदरसा तो बहुत ही अच्छा है,यहाँ का माहौल तो घर से भी अच्छा है लेकिन उसे क्या पता होता है के ये सब उसके बलात्कार की तयारी चल रही होती है,मैं में खुद कई हाफिज लोगों से इस बारे में तहक़ीक़ किया, वो तो जितनी बाते बताये वह सब मुझ में लिखने की हिम्मत नहीं है या यह कह सकता हूँ कि मेरा जमीर लिखने की इज़ाज़त नहीं दे रहा है.एक बात पे मुझे बहुत हँसी आयी थी मै चाहता हूँ के वो आप से भी बताता चलूँ- एक लड़का लड़की का जैसे लव अफेयर (Love Affair) चलता है और लड़का लड़की के प्यार में पागल रहता है उसी तरह लड़का लड़का का भी लव अफेयर (Love affair) चलता है.एक लड़का दूसरे लड़के को ई लव यू (I LOVE YOU) बोलता है. और जब तक मोहब्बत का इकरार न कर ले तब तक इज़हार का सिलसिला चलता रहता है.मुझ से यहाँ तक भी बताया गया के इस काम में अक्सर उस्ताद भी शामिल हैं,कुछ उस्ताद इस काम के लिए पकडे भी गए हैं या उन पे इल्ज़ाम भी लगा है.

वह जगह जहाँ क़ुरआन की तालीम दी जाती हो अगर वहां ऐसा काम हो तो आप फिर क्या सोचेंगे?आप किस तरह अपने बच्चों को ऐसी जगह पढ़ने के लिए भेज सकते हैं?इतनी नापाक़ जगह पे अल्लाह की रहमत कैसे हो सकती है,क्या यही वजह है कि यहां के अक्सर हाफिज़ क़ुरान ६ महीने में ही क़ुरान भूल जाते हैं??पिछले 10 साल से देख रहा हूँ जितने भी वहां से हिफ़्ज़ कर के निकल रहे हैं वो 6 महीने में क़ुरआन को भूल जाते हैं.लेकिन पहले ऐसा बहुत ही कम था लेकिन अब ज्यादातर ऐसा ही हो रहा है.

मैं तमाम मदरसों से अपील कर रहा हूँ के मेहरबानी कर के मदरसे के निज़ाम को ठीक कीजिये वर्ना अल्लाह क्या हाल करेगा ये मुझे बताने की जरूरत नहीं है.अपने कानून में सख्ती बरते और कोई भी हो उस के साथ इन्साफ करें और अल्लाह के क़ानून पे चलें.अल्लाह वक़्त दिया है तो उसके पकड़ को कमजोर न समझें,जब अल्लाह पकड़ लेगा तो फिर दुनिया की सारी पकड़ ढीली पड़ जाएगी..आप लोग ऐसे इदारे में हैं जहाँ से दीन की रौशनी निकलती है अल्लाह के वास्ते इस क़ौम के लिए अँधेरा पैदा मत कीजिये.

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