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Sunday, March 18, 2018

फांसी से पहले कोर्ट में “कुरआन” ले गये थे सद्दाम, जानिये “फांसी” से पहले क्या थे उनके आखिरी शब्द

फांसी से पहले कोर्ट में “कुरआन” ले गये थे सद्दाम, जानिये “फांसी” से पहले क्या थे उनके आखिरी शब्द:-Er.Mintu



ये सद्दाम साहब के आखरी पेशी की बात है,जिसे मैंने कलम बंद किया है।
सद्दाम हुसैन साहब हाथ में क़ुरान सरीफ लिए अपने दोस्तों के साथ कोर्ट में हाजिर हुए और सबसे आगे बैठ गए।
जज जो की एक इराकी ही था उसने कहा, आपको कुछ कहना है?

सद्दाम साहब ने बिना किसी तमकीद के कहा, हा मुझे बहुत कुछ कहना है और जब मैं कुछ कहूँ तो मुझे अपने भाई की तरह समझो अपने इराकी भाई की तरह।

और मैं यहाँ अब अपना बचाव नही करूँगा बल्कि मैं यहाँ आपका बचाव करूँगा,सारे इराकी भाइयो का बचाव करूँगा।
मैं जानता हूँ आप पर अमेरिका का दबाव है लेकिन मैं आपसे फिर भी कहूँगा की आप दिल से और हिम्मत से काम लो।
सद्दाम साहब सर झुका लेते है…फिर बोलना शुरू करते है!
लेकिन कल मैंने आपसे तीन बार कहा की नमाज का वक़्त हो रहा है नमाज का वक़्त हो रहा है मगर आपने अनसुना कर दिया!
जज बीच में टोकता है,नही…नही! मैंने अनसुना नही किया,मैं अदालत की कार्यवाही कैसे रोक देता?
सद्दाम साहब गुस्से से आग बबूला हो जाते है,और कहते है, क्या!अल्लाह अपनी बंदगी के लिए अदालत की कार्यवाही खत्म होने का इंतज़ार करेगा?
याद करो ये इराक का कानून है की नमाज के वक़्त कोई भी सरकारी काम नही होगा,और आज ये अमेरिकी इराकी भाइयो को समझा रहे है की ये कानून सद्दाम का बनाया हुआ है,क्या तुम भूल गए की इस्लाम ही इराक का कानून है?
अफ़सोस!तुम इन अमेरिकियो के बहकावे में आ गए!
सद्दाम साहब इसके बाद फिर कुछ देर के लिए खामोश हो गए।
आगे बोले तो बातो में नमी थी,….मेरे हाथो में एक घडी हुआ करती थी जिसे मेरी बेटी ने मुझे दिया था इन अमेरिकियो ने उसे छिन लिया।
अपने आप को ताक़तवर कहने वाले ये अमेरिकी मुझे और मेरे साथियो को जानवरो की तरह मारते है।सद्दाम साहब हाथ के इशारे से कहते है….इनको दिवार के सहारे खड़ा कर के बंदूक के कुंडो से मारते रहे जब तक की ये बेहोश न हो गए।युसूफ को इतना मारा की इनके पैर की हड्डी बाहर निकल गयी।
ये समझते है ऐसा कर के इन्होंने सद्दाम को छोटा कर दिया बल्कि ये नही जानते की सद्दाम को बहुत बड़ा कर दिया है,बहुत बड़ा।
और मैं ये किसी का दिल रखने के लिए नही कह रहा हूँ बल्कि इसलिए कह रहा हूँ ताकि आप इनके कायरता का अंदाजा लगा सको।
तभी कुछ लोग जो अदालत ही में थे,हंसने लगते है।
ये बात सद्दाम साहब के साथियो को नागवार गुजरती है और वो उनसे उलझ जाते है।
सद्दाम साहब हाथ के इशारे से सबको चुप हो जाने और बैठ जाने को कहते है,और कहते है..,युसूफ जंगल में जब शेर चलता है तो दरख़्त पे बैठा बंदर हँसता है तो शेर उसकी हंसी की परवाह नही करता।
माय लार्ड,मुझ पर इल्जाम है की मैंने अपनी सदारत में एक खास जमात का खून बहाया है।
मेरा खुदा जानता है की उस हैवानियत से जितनी तक़लीफ़ उनके अपनों को हुई उससे ज्यादा मुझे हुई।
मैं बस अब यही कहूँगा की अगर मैं गुनहगार साबित हो जाऊ तो मुझे इराकी कानून के हिसाब से सजा दे दी जाये।मैं अब अपने आप को बेक़सूर साबित नही कर सकता मेरा रब मुझे इसका अज्र देगा।मुझे फख्र है की मैं 35 साल तक इराक का मुहाफिज रहा।
और फिर आखिर में वही हुआ जिसकी उम्मीद सबको थी,सद्दाम साहब को फांसी देने की तारीख मुक़र्र कर दी गयी।
सद्दाम साहब के साथियो ने नारे तक़बीर की समा बुलन्द की जिसपर खुद सद्दाम साहब ने अल्लाह हु अकबर कहा और फिलिस्तीन जिंदाबाद कहना न भूले।उन्हीने दो बार फिलिस्तीन जिंदाबाद कहा।
जब सद्दाम साहब को फांसी दी जा रही थी तो उन्होंने नक़ाब पहनने से इनकार कर दिया।
कुरान की तिलावत की,हँसते हुए सिगरेट पि..चेहरे पर मौत का कहि खौफ नजर आ ही नही रहा था और फिर कलमा पढ़ते पढ़ते शहीद हो गए।
शायर का एक नजराना…!
सर जुल्म के आगे ना झुका जिसका वो सद्दाम,
रोके से भी रुका ना लश्कर जिसका वो सद्दाम,
मैदान में रहा बनके जो तूफान वो सद्दाम,
दुश्मन के लिए जो रहा चट्टान वो सद्दाम,
जंग को जो खेल समझता था वो सद्दाम,
फौलाद का जो हौसला रखता था वो सद्दाम।
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Collected BY :- Masroor Alam

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